Submission 1545

मुझमें कुछ ख़ास नहीं !

Submitted By: Rohit Choudhary

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मुझमे कुछ ख़ास है, कि मुझमे कुछ ख़ास नहीं। वो इस तरह मेरे पास है, जैसे कभी मेरे पास नही। मैं सहरा हुँ मेरी प्यास है, वो पानी की प्यास नहीं। उसकी याद अब एक त्रास है, याद ना आना त्रास नहीं। अंधेरे में रोशन एहसास है, मगर रोशनी सा एहसास नहीं। जीवन चाहता एक स्वास है, 'केवल' जीने को स्वास नहीं। तू उसपे मरता है, ये खास है, 'केवल' तुझमे कुछ खास नहीं ।

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Reg ID: HF25-5043

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