पिता कि झलक
Submitted By: Dr Aisha
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हाथों ने जिनके चलना सिखाया नन्हें कदमों को आगे बढ़ना सिखाया, वो जो हर ग़म को दिल में छुपा लेता है क्या उसी फरिश्ते का नाम पिता है ना जिसे कभी रोते देखा चुपचाप सर झुकाए जिन्दगी जितें देखा चट्टान सी हिम्मत दिल में समाए परिवार को साथ लिए चलते देखा कौन कहता है भगवान, इंसान से अलग है मूरत भगवान कि मेरे पिता कि झलक है सुरत भगवान कि मेरे पिता कि झलक है
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Reg ID: HF25-5072
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