Submission 1748

वह

Submitted By: Ravi Ranjan Sharma

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चेहरा कमल ,सरल, सुलझे सवाल, उसपे द्वे सुगम ,सहज ,सिद्ध जवाब || निरंतर नयन पर अनियंत्रित बाल, देखके चंदा, चेतना पर हुआ घाव || वह देखे ऐसे कृष्ण-काजल लगाए, कोमल कर्ण से लगे स्वर्णिम कर्णफूल, और लबों पर मधुर मुस्कान समाए, बेला बीते जाए, बुद्धि जाए सब भूल || प्रहर ऐसा , मृत्यु-शय्या निकट लगे , शब्दों के सायक भी न त्यागे कमान || एक क्षण बीते नहीं दूसरे छन ही हुए सगे , रवि-शशि ,स्नेह-आस्था लगे समान || संध्या शीश पर सवार, सूक्ति हुए नहीं समाप्त, मन विचलित हुए, बेला हुए पार||

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Reg ID: HF25-5094

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