Submission 2653

कूनो की धरती में चीतों का पुनर आगमन

Submitted By: Adarsh kumar singh

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ईश्वर की कृपया से अंगड़ाई लिए सोया हु प्रकृति की छांव में बिस्तर डाले सोया हु पत्ते आकर का था पत्ते ही मेरी पहचान है रीड की हड्डी में कूनो नदी विराजमान है इतिहास को संभाला है किलो को समाया है युद्ध खत्म कराए है सौगात नई पाई है संप्रभुता वापस आई है चीतों का आगमन है बाघों की नुमाइश में चीतल और बारहसिंगों का काल वापस आया है बाघों का प्रतिद्वंद्वी घूम फिर के आया है

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Reg ID: HF25-5402

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