Submission 1816

खामोशी अभी खलती नहीं

Submitted By: Jiten Kalal

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खामोशी अभी खलती नहीं, खुशी चेहरे पर खिलती नहीं। नहीं देते सपने दस्तक निंदियारों में, नहीं है कोई इन यादों की गलियारों में। आज भी अकेलेपन की चादर तले, गूँजती हैं ख्वाहिशें जो बचपन में पले। सुला कर भी लेता इन ख्वाहिशों से, मगर जिस मासूमियत का गला घोटा इन हाथों से, उनसे कोई सुला नहीं। खामोशी खलती नहीं, खुशी चेहरे पर खिलती नहीं।

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Reg ID: HF25-5113

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